ॐसंस्कृति शब्द सम् और कृति, इन दो शब्दों के संयोग से बना है। सनातन धर्म में हम मानते हैं कि मनुष्य, पशु, पक्षी आदि सब भगवान के छोटे से छोटे अंग से उत्पन्न होते हैं। ज्ञान स्वरूप सच्चिदानंद परमेश्वर ‌से ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति होती है। हम उन्हीं सच्चिदानंद परमेश्वर के बनाए धर्मों पर चलने के लिये विवश हैं और चाहते हुए भी किसी नए धर्म का अनुष्ठान नहीं कर सकते।

कारणवश पौराणिक काल से ही ऋषि-मुनियों ने सनातन धर्म की संस्कृति को उसी परमेश्वर के विलक्षण रूपों के आधार पर ढाला है। परिणाम स्वरूप इस धर्म में विविध प्रकार की रीतिआँ, त्योहार और कर्म-काण्ड देखने को मिलते हैं। एक ही कथा को अलग-अलग सम्प्रदाय अलग-अलग रूप से अपनाते हैं। फिर भी सनातनियों में भेद-भाव नहीं देखा जाता है। धर्म के संरचना की इस त्रुटि का कारण अनुयाइओं की मूढ़ता या अज्ञान नहीं है। यह विविधता तो वैज्ञानिक तथ्यों से दूर कलात्मक स्वीकृति का आचरण सिखलाती है।

कहीं तो परमेश्वर एक पशु का रूप धर के भयानक दण्ड का उदाहरण देते हैं और कहीं वे संत के रूप में क्षमा और दया के प्रतीक बन जाते हैं। उसी प्रकार कभी तो एक साधारण मनुष्य भी अध्यात्म के कठिन परिश्रम से शिव स्वरूप को प्राप्त होता है और कभी व्यक्ति निमित्त मात्र सिद्ध होता है। धर्म कहीं तो हमें न्याय के लिये अनगिनत जानों की बलि चढ़ाने को कहता है और कहीं जन समुदाय के लिए आत्मसमर्पण भी मांगता है। राष्ट्र और समाज के ये सारे क़ायदे-क़ानून उन्हीं पौराणिक-सांस्कृतिक तथ्यों को आधार मानकर बनाए जाते हैं। सारांश में हम कह सकते हैं कि निर्विवाद रूप से एक न्यायिक समाज की संरचना किसी एक ही दृष्टिकोण को आधार शिला मान कर नहीं बनाई जा सकती है।

“मैं उस धर्म से जुड़ा होने पर गर्व महसूस करता हूँ जिसने विश्व को उदारता और अपार स्वीकृति सिखलाई है। हम न तो केवल सर्वस्व सहिष्णुता में विश्वास रखते हैं, बल्कि सारे धर्मों को सत्य भी मानते हैं।“स्वामी विवेकानन्द

“भारतीय दर्शन के संवाद के बाद, क्वॉंन्टम भौतिकी के कुछ विचार जो बहुत भ्रांत लग रहे थे, अचानक बहुत अधिक समझ में आने लगे”वर्नर हाइसेन्‌बर्ग

“भारत में बीस लाख देवी-देवता हैं और सब की पूजा होती है। धर्म के मामले में बाकी सारे देश भिक्षुक हैं, बस भारत ही एक लखपति है।“मार्क ट्वेन

संस्कृति

ॐ यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥

अगर हम सनातन धर्म के लुप्त आदर्शों और तथ्यों को देखें तो हमें हिंदु धर्म के आचरण का अनुभास हो जाता है। वे केवल विस्मयकारी साहित्य ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों से भी परिपूर्ण हैं जो जानकार को रहस्यमय वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि दे सकते हैं। निम्नलिखित कुछ पौराणिक तथ्य हैं जो बताते हैं कि सनातन धर्म के अंतर्निहित सिद्धांत किस प्रकार अद्भुत भारतीय संस्कृति का उत्कर्ष करते हैं।

ध्यान विधि और भगवान का विराट रूप

ॐयह तो हम सब जानते हैं कि हिंदू विभिन्न प्रकार के देवों की पूजा करते हैं। किंतु हम उस परमेश्वर में भी विश्वास रखते हैं जो सारी…Read more

श्री विष्णु के अवतार

ॐसच्चिदानंद स्वरूप भगवान्‌ श्रीकृष्ण को हम नमस्कार करते हैं, जो जगत्‌ की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश के हेतु तथा आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक – तीनों प्रकार के…Read more