ॐकोई भी धर्म मूलतः उसकी कथाओं से ही जाना जाता है। कथाएं चाहे सच्ची हों या फिर बनावटी, वे श्रोता को वाचक के दृष्टिकोण से अध्यात्म का ज्ञान देतीं हैं। विद्या अथवा ज्ञान मनुष्य जाति के बुद्धि के विकास के लिये अति आवश्यक होता है। परंतु गणित, वैज्ञानिक तथ्य आदि तो मनुष्य को केवल वस्तु विशेष की ही जानकारी देते हैं और प्रायः लोगों के लिये अरुचिकर भी होते हैं। तथ्य का ज्ञान तो केवल उन्हीं लोगों के लिये उपयोगी होता है जो आम दिनचर्या में उसका उपयोग करते हैं। परन्तु कला और साहित्य इसके विपरीत आत्म चेतन तथा सापेक्ष होने के कारण आम जन समुदाय को लुभाता है। उदाहरण के लिये एक सुशील स्त्री भी किसी अभिमानी व दुष्ट व्यक्ति की कहानी से लाभ उठा सकती है। ऐसे ही किसी चोर की कथा भी किसी संत का उपलक्ष हो सकती है। साहित्यिक कला की यह विशेषता इसे हर व्यक्ति के लिये ज़रूरी बना देती है।

सनातन धर्म की कथाएँ केवल मनोरंजक व दार्शनिक ही नहीं होतीं। पौराणिक काल ही से ऋषिओं-मुनिओं ने जीवन की सभ्यता का लेखा रखा है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर भी खरा उतरता है और रमणीय भी है। सनातन धर्म की कथाओं को हम कई अर्थों का सूचक मान सकते हैं। वे आज के साहित्यकारों के आदर्श भी सिद्ध होते हैं और आज के दार्शनिकों एवं मनोवैज्ञानिकों के लिये सूक्ष्म अन्तर्दृष्टि भी प्रदान करते हैं। पौराणिक कथाएँ वैज्ञानिकों के लिये परिज्ञान का साधन बन सकतीं हैं। वे उस पुरातन समय की वास्तविक घटनाओं का लेखा भी प्रस्तुत करतीं हैं जिसका आज के इतिहासकार केवल काल्पनिक अनुमान ही लगा सकते हैं।

“सत्व ज्ञान तो बस एक ही होता है, जो हमें स्वतंत्र बनाता हो। इसके अतिरिक्त सभी ज्ञान मनोरंजन मात्र है।“लीओ टॉल्सट्वॉय

“देवों का प्रत्यक्ष बहुलीकरण पहली झलक में तो विस्मित करता है, किंतु आपको तुरंत ही पता चलता है कि वे सब एक ही भगवान्‌ के अंग हैं। हर स्थिति में एक परमेश्वर रहता है जिसको व्यक्त नहीं किया जा सकता है। हिंदुत्व की यह विशेषता इसे विश्व का सबसे उदार धर्म बना देती है। क्योंकि इसके वह सर्वोत्कृष्ट परमेश्वर अन्य सारे ही देवों का समावेश करते हैं।“ जॉर्ज बर्नान्ड शॉ

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः | गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः ||

सनातन धर्म ने ब्रह्माण्ड को समझने की एक नई पद्धति का आविष्कार किया है। वह वस्तु को दो भेद से सीमांकित करता है – एक पद्धति सांख्य विद्या से अधिभूत का शोधन करती है और दूसरी पद्धति आधिदैविक धरातल पर वस्तु में उति व वृत्ति को समझने का प्रयास करती है। इन्हीं पद्धतियों से ऋषि गण वस्तु भेदों की संज्ञा का निर्धारण करते हैं। वे समय तथा स्थान के घटकों का संभावन कर के कथाओं में पात्रों का शोधन करते हैं। इसी लिये पौराणिक कथाएँ इतिहास, कला, विज्ञान, समाज शास्त्र, राज धर्म इत्यादि सभी विद्याओं का गुप्त रूप से समावेश करतीं हैं। अगर इनका पाठ ब्राह्मण करें तो तप की प्राप्ति होती है, अगर क्षत्रिय करें तो राज धर्म का विकास होता है, वैश्य करें तो इस लोक और पर लोक में भी समृद्धि प्राप्त होती है, और अगर कोई शूद्र करे तो वह उसके मन-बुद्धि में पुण्य व भक्ति का संचार कराती हैं।

सनातन धर्म की कथाएँ मनोरंजक और रहस्यमय होतीं हैं। ज्यों-ज्यों हमें इसका ज्ञान होता जाता है, हम भगवद् भक्ति में डूबने लगते हैं और परमेश्वर की लीलाओं से विस्मित हो कर अपने आप को धन्य मानने लगते हैं। पुराण, महाभारत, रामायण आदि से लीं हुईं यथा रूप कुछ कथाओं का संग्रह यहाँ आपके समक्ष प्रस्तुत है।

शरभ – शिव के एक अवतार की कथा

ॐशिव पुराण में भगवान शिव के शरभ अवतार की व्याख्या की गयी है। नंदीश्वर और सनत्कुमार के अनुवाद में भगवान नंदीश्वर शिव के चमत्कारी रूप की…Read more

गणेश जी – विघ्न-विनायक की कथा

ॐभविष्य पुराण के अनुसार, राजा परीक्षित के पौत्र शतानीक ने पौराणिक धर्म और कर्म-काण्ड की दीक्षा सुमंतु मुनि से ली थी। उन दोनों के संवाद में…Read more